असाइनमेंट
औरंगज़ेब, मुगल साम्राज्य का विस्तार एवं विघटन
(MJC-7, इतिहास ऑनर्स, सेमेस्टर-IV)
विद्यार्थी का नाम : _______________________
रोल नंबर : _______________________
विभाग : इतिहास
महाविद्यालय : _______________________
सत्र : 2024–28
जमा करने की तिथि : 14 अगस्त 2026
विषय सूची
- प्रस्तावना
- औरंगज़ेब का परिचय
- औरंगज़ेब का प्रारम्भिक जीवन
- गद्दी पर बैठने की प्रक्रिया
- औरंगज़ेब की प्रशासनिक व्यवस्था
- मुगल साम्राज्य का विस्तार
- औरंगज़ेब की धार्मिक नीति
- दक्षिण भारत की नीति
- मुगल साम्राज्य के विघटन के कारण
- औरंगज़ेब का मूल्यांकन
- निष्कर्ष
- संदर्भ ग्रंथ
प्रस्तावना
मुगल साम्राज्य भारतीय इतिहास का सबसे शक्तिशाली और विशाल साम्राज्य था। अकबर, जहाँगीर और शाहजहाँ के शासनकाल में इसकी शक्ति और प्रतिष्ठा चरम पर पहुँची। शाहजहाँ के बाद उसका पुत्र औरंगज़ेब (1658–1707 ई.) मुगल सिंहासन पर बैठा। वह एक योग्य सेनानायक तथा कुशल प्रशासक था, किन्तु उसकी नीतियों और निरन्तर युद्धों के कारण मुगल साम्राज्य धीरे-धीरे कमजोर होने लगा। उसके शासनकाल में साम्राज्य का क्षेत्रफल सबसे अधिक था, परन्तु उसके अन्त तक साम्राज्य के विघटन की प्रक्रिया भी आरम्भ हो चुकी थी।
औरंगज़ेब का परिचय
औरंगज़ेब का पूरा नाम अबुल मुज़फ़्फ़र मुहिउद्दीन मुहम्मद औरंगज़ेब आलमगीर था। उसका जन्म 3 नवम्बर 1618 ई. को दाहोद (वर्तमान गुजरात) में हुआ। वह शाहजहाँ और मुमताज़ महल का तीसरा पुत्र था। उसने 1658 ई. में अपने भाइयों दारा शिकोह, शाह शुजा और मुराद बख्श को पराजित कर सत्ता प्राप्त की तथा आलमगीर प्रथम की उपाधि धारण की।
औरंगज़ेब का प्रारम्भिक जीवन
औरंगज़ेब बचपन से ही अनुशासित, धार्मिक तथा परिश्रमी था। उसे अरबी, फ़ारसी, इस्लामी कानून तथा सैन्य शिक्षा प्राप्त हुई। वह प्रशासनिक कार्यों में भी दक्ष था। युवावस्था में उसे दक्कन, गुजरात तथा मुल्तान जैसे प्रान्तों का सूबेदार बनाया गया, जहाँ उसने शासन और युद्ध दोनों का अनुभव प्राप्त किया।
गद्दी पर बैठने की प्रक्रिया
1657 ई. में शाहजहाँ के बीमार होने पर उत्तराधिकार का युद्ध प्रारम्भ हुआ। दारा शिकोह, शाह शुजा, मुराद बख्श और औरंगज़ेब सभी सिंहासन के दावेदार थे।
- 1658 ई. में समूगढ़ के युद्ध में औरंगज़ेब ने दारा शिकोह को पराजित किया।
- उसने मुराद बख्श को बंदी बना लिया।
- शाह शुजा को भी परास्त किया।
- शाहजहाँ को आगरा के किले में नजरबंद कर दिया।
- इसके बाद औरंगज़ेब मुगल सम्राट बना।
औरंगज़ेब की प्रशासनिक व्यवस्था
औरंगज़ेब ने प्रशासन में कठोर अनुशासन बनाए रखा।
मुख्य विशेषताएँ—
- प्रशासन पर सम्राट का पूर्ण नियंत्रण।
- न्याय व्यवस्था में इस्लामी कानूनों का पालन।
- सेना का विस्तार।
- राजस्व व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने का प्रयास।
- भ्रष्ट अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई।
उसके शासनकाल में फ़तावा-ए-आलमगीरी नामक इस्लामी कानूनों का संकलन तैयार कराया गया।
मुगल साम्राज्य का विस्तार
औरंगज़ेब के समय मुगल साम्राज्य अपने सबसे बड़े क्षेत्रफल तक पहुँचा।
उसने निम्नलिखित राज्यों को अपने अधीन किया—
- बीजापुर (1686 ई.)
- गोलकुंडा (1687 ई.)
उसने दक्कन में लगभग 25 वर्षों तक अभियान चलाया। उसके शासनकाल में मुगल साम्राज्य उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में तंजावुर के निकट तक तथा पूर्व में असम की सीमा से लेकर पश्चिम में अफ़ग़ानिस्तान के कुछ भागों तक विस्तृत था।
औरंगज़ेब की धार्मिक नीति
औरंगज़ेब की धार्मिक नीति विवादास्पद रही।
उसकी प्रमुख नीतियाँ—
- 1679 ई. में जज़िया कर पुनः लगाया।
- अनेक हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त कराया।
- इस्लामी रीति-नीति को प्रोत्साहन दिया।
- दरबार में संगीत पर प्रतिबंध लगाया।
- गैर-मुस्लिमों के प्रति कठोर नीति अपनाई।
इन नीतियों के कारण अनेक हिन्दू शासकों तथा जनता में असन्तोष फैल गया।
दक्षिण भारत की नीति
औरंगज़ेब ने सम्पूर्ण दक्कन पर अधिकार स्थापित करने का प्रयास किया।
उसे मराठों के साथ लम्बे समय तक संघर्ष करना पड़ा।
शिवाजी, सम्भाजी, राजाराम तथा ताराबाई के नेतृत्व में मराठों ने लगातार मुगलों का विरोध किया। इन युद्धों में मुगल सेना का अत्यधिक धन, समय तथा सैनिक शक्ति नष्ट हुई।
मुगल साम्राज्य के विघटन के कारण
औरंगज़ेब की मृत्यु (1707 ई.) के बाद मुगल साम्राज्य तेजी से कमजोर होने लगा।
मुख्य कारण निम्नलिखित थे—
1. लम्बे दक्कनी युद्ध
लगातार लगभग 25 वर्षों तक चले युद्धों से राजकोष खाली हो गया।
2. धार्मिक असहिष्णुता
जज़िया कर तथा मंदिरों के विध्वंस से हिन्दुओं में असन्तोष उत्पन्न हुआ।
3. मराठों का उदय
मराठा शक्ति निरन्तर बढ़ती गई और मुगलों के लिए चुनौती बन गई।
4. राजपूतों से मतभेद
मेवाड़ और मारवाड़ के साथ संघर्ष से मुगलों की शक्ति कमजोर हुई।
5. विद्रोह
जाट, सिक्ख, सतनामी तथा बुन्देलों ने अनेक स्थानों पर विद्रोह किए।
6. आर्थिक संकट
निरन्तर युद्धों के कारण राजकोष खाली हो गया तथा कर व्यवस्था कमजोर हो गई।
7. कमजोर उत्तराधिकारी
औरंगज़ेब के बाद कोई भी सम्राट उसके समान शक्तिशाली नहीं था।
8. प्रशासनिक भ्रष्टाचार
मनसबदारी तथा जागीरदारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार बढ़ गया।
औरंगज़ेब का मूल्यांकन
इतिहासकारों की दृष्टि में औरंगज़ेब एक परिश्रमी, अनुशासित तथा योग्य प्रशासक था। उसने मुगल साम्राज्य का क्षेत्रफल सबसे अधिक बढ़ाया, किन्तु उसकी धार्मिक नीति, निरन्तर युद्ध और कठोर शासन ने साम्राज्य की नींव को कमजोर कर दिया। उसकी मृत्यु के कुछ दशकों बाद ही मुगल साम्राज्य का पतन प्रारम्भ हो गया।
निष्कर्ष
औरंगज़ेब का शासन भारतीय इतिहास का अत्यन्त महत्वपूर्ण काल था। उसने मुगल साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार किया, परन्तु उसकी नीतियों और लम्बे युद्धों ने साम्राज्य की आर्थिक, राजनीतिक तथा सैन्य शक्ति को कमजोर कर दिया। परिणामस्वरूप उसके बाद मुगल साम्राज्य का तीव्र विघटन हुआ। इस प्रकार औरंगज़ेब का शासन मुगल साम्राज्य के उत्कर्ष और पतन—दोनों का प्रतीक माना जाता है।
संदर्भ ग्रंथ
- सतीश चन्द्र — मध्यकालीन भारत
- जे. एन. सरकार — औरंगज़ेब का इतिहास
- विपिन चन्द्र — भारत का इतिहास
- आर. सी. मजूमदार — मध्यकालीन भारत
- एनसीईआरटी — भारतीय इतिहास (मध्यकालीन भारत)
यह असाइनमेंट फुल-स्कैप पेपर पर लगभग 10–12 पृष्ठों में साफ़ एवं सुव्यवस्थित हस्तलिखित रूप में लिखा जा सकता है।
